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    असीम है परमात्मा, अनंत है परमात्मा
    दूसरा प्रश्न: भगवान, इस मधुशाला से हम जितना पीते हैं उतना ही कम क्‍यों लगता है? मुझे ऐसा लगता है कि मैं चूकती जाती हूं। इतना आप पिलाते हैं, मैं नहीं पीती हूं। मेरे वश [...]
    तुम्हें रंगने के धंधे में ही लगा हूं
    दूसरा प्रश्न: कान्हा! आज अंतिम होली है; क्या होली नहीं खेलोगे? राधा! होली ही खेल रहा हूं। कभी होली, कभी होला। चौबीस घंटे वही चल रहा है, । रंगरेज ही हो गया हूं। काम ही [...]
    Osho on His Experience of Enlightenment
    I am reminded of the fateful day of twenty-first March, 1953. For many lives I had been working – working upon myself, struggling, doing whatsoever can be done – and nothing was happening. Now I understand [...]